Mahakal Shringar On Mahashivratri 2025: भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि पर्व की धूम पूरे देश में होती है. इस पर्व से कई दिनों पहले से ही तमाम मंदिरों में तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं. इसी तरह इस बार भी जब महाशिवरात्रि पर्व को कुछ ही दिन बचे हैं और काशी से लेकर उज्जैन तक महादेव के तमाम मंदिरों में तैयारियां चलने लगी हैं. मध्यप्रदेश के उज्जैन की बात करें तो महाकालेश्वर मंदिर में भी राजाधिराज भगवान महाकाल की भव्य पूजा आराधना की विधियां और व्यवस्थाएं की जाने लगी हैं.
निभाया जाता है एक एक रस्म
महाकालेश्वर मंदिर के बाबा महाकाल को हर दिन अलग-अलग रूप में सुसज्जित किया जा रहा है. महाशिवरात्रि आने के 9 दिन पहले से ही यहां महाकाल को दूल्हे की तरह सजाया जाता है और एक एक दिन एक एक रस्म रिवाज निभाया जाता है. ध्यान दें कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ जिसके कारण यह पर्व हर शिवभक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है. ऐसे में महादेव की उपासना को लेकर भक्त अति उत्साहित होते हैं.
महाकाल मंदिर में शिव नवरात्रि की परंपरा
महाशिवरात्रि से पहले महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि मनाए जाने की परंपरा है जिसके तहत महाशिवरात्रि के 9 दिन पहले से ही बाबा महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है. तय योजना के तहत सुबह भस्म आरती से भोग आरती तक बाबा महाकाल को स्नान करवाते समय हल्दी लगाई जाती है और दूल्हे के रूप में उनकी पूजा की जाती है.
महाकाल बाबा की आराधना
महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल को दूल्हा बनाकर माता पार्वती से उनके विवाह की तैयारी की जाती है. श्रद्धालु भी विवाह के उत्सव मग्न हो जाते हैं. हर दिन मंगल गीत गाए जाते हैं. हालांकि भगवान महाकाल हर दिन निरंकार से साकार रूप में आते हैं लेकिन शिव नवरात्रि के समयावधि में बाबा महाकाल को वस्त्र धारण करवाया जाता है. भांग, सूखे मेवे और अबीर के साथ ही कंकू, गुलाल से बाबा का श्रृंगार आदि किया जाता है. इन नौ दिनों में भगवान को इत्र अर्पित किया जाता है. तो कुछ इस तरह महाशिवरात्रि से पहले राजाधिराज महाकाल बाबा की आराधना की जाती है.