वाराणसी । उत्तर प्रदेश के वाराणसी में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। बुधवार सुबह से ही काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई है। इस बीच, निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए। इस अवसर पर उनके साथ नागा साधु संन्यासियों भी मौजूद रहे। हाथों में तलवार, त्रिशूल लहराते हुए बैंड बाजों संग पेशवाई निकाली गई।
निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पांच अखाड़ों ने सामूहिक रूप से महादेव का अभिषेक- पूजन किया और महादेव को शुभकामनाएं भी दीं। महाकुंभ को भव्य- दिव्य और शानदार बनाने के लिए हम सभी की हार्दिक सराहना करते हैं।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने मीडिया से बात करते हुए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मैं आईजी, डीजीपी को बधाई देता हूं, जिन्होंने बहुत ही अच्छा काम किया है। बाबा के दर्शन के साथ ही आज मेला भी समाप्त हो गया है।
मान्यता है कि प्रयागराज में महाकुंभ स्नान के बाद साधु-संत काशी पहुंचते हैं और काशी पहुंचने के बाद पेशवाई निकाली जाती है। पेशवाई के माध्यम से साधु-संत अपने मुख्य कार्यालय पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि के दिन अखाड़े अमृत स्नान करते हैं।
महाशिवरात्रि का यह उत्सव काशी में उस समय और भी खास हो गया, जब महाकुंभ का पलट प्रवाह यहां देखने को मिला। महाकुंभ और महाशिवरात्रि का यह संयोग वर्षों बाद बना है, जिसने श्रद्धालुओं की संख्या को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है।
सीएम योगी के निर्देश पर मंदिर न्यास और जिला प्रशासन ने इस अपार जनसमूह को संभालने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। काशी विश्वनाथ धाम परिक्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बल, एटीएस कमांडो और एसटीएफ तैनात हैं। उच्चाधिकारी लगातार क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा ले रहे हैं।
काशी में महाशिवरात्रि पर अखाड़ों की शोभायात्रा भी इस बार भव्यता के साथ निकली। जूना अखाड़े के नागा साधु त्रिशूल, तलवार और गदा लेकर ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए निकले। पेशवाई का स्वागत फूलों की वर्षा और माल्यार्पण के साथ किया गया।
महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु बाबा का दर्शन-पूजन कर रहे हैं। महाशिवरात्रि के मद्देनजर काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
महाकुंभ का समापन भी महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ ही संपन्न हो जाएगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक महाकुंभ नगर में 65 करोड़ से ज्यादा लोग गंगा में डुबकी लगा चुके हैं।