कैमोर पिछले कई वर्षों से संचालित एसीसी अस्पताल जो एसीसी श्रमिकों के स्वास्थ्य के देखभाल के साथ ही साथ कैमोर के नागरिकों के भी स्वास्थ्य हित लाभ के लिए खोला गया था, जिसे पिछले दो-तीन दिन पहले नाम बदलकर ऑक्यूपेशनल हेल्थ सेंटर कर दिया गया है।
यह प्रश्न हर श्रमिक और हर नागरिक के मन में है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया..?
हम बता दें की एसीसी अस्पताल 50 बिस्तरों का अस्पताल पिछले लगभग 70 वर्षों से कैमोर में संचालित हो रहा है, जिसमें तीन उच्च तकनीकी कुशलता के दक्ष डॉक्टर होते थे।
रजिस्ट्रीकृत फार्मासिस्ट लैब टेक्नीशियन कुशल नर्स कंपाउंडर आदि होते थे, तथा कई मेडिकल सुविधा प्लास्टर होना , महिलाओं की डिलीवरी होना, आंखों का इलाज, एक्सरे ,तथा कई गंभीर बीमारियों की जांच एवं संपूर्ण इलाज की सुविधा ए सी सी अस्पताल में होती थी।
जो धीरे-धीरे कम होती या कहा जाए कि समाप्त हो रही है क्यों..?
सूत्रों के हवाले से बताया गया कि एक जन सेवक द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कटनी के समक्ष एक शिकायत की गई की.. एसीसी अस्पताल बिना लाइसेंस बिना फार्मासिस्ट के अवैध रूप से संचालित हो रहा है, जिसकी जांच कर उचित वैधानिक कार्यवाही की जावे।
कार्यवाही नहीं होने पर उन्होंने जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष भी कार्यवाही हेतु आवेदन किया जिसके डर से आनंन-फानन में एसीसी प्रबंधन द्वारा यह बदलाव किया गया है।
श्रम संगठनों से जुड़े पदाधिकारीयों का मानना है कि कारखाना अधिनियम के अंतर्गत जिस उद्योग में 300 से ऊपर श्रमिक होंगे वहां पर संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा हेतु अस्पताल होना अनिवार्य है।
लेकिन कंपनी प्रबंधन द्वारा लगातार श्रम कानून का उल्लंघन पिछले काफी समय से देखने को मिल रहा है जिसमें पूर्व से 24 घंटे संचालित अस्पताल की सुविधा को बंद कर सिर्फ दिन में ही सुबह 9:00 से 5:00 तक खोला जाता है तथा कई स्वास्थ्य सुविधाओं मैं भी कटौती की गई है।
आखिरकार क्यों क्षेत्र के श्रमिकों एवं आम नागरिकों को पूर्व से प्राप्त आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा समाप्त हो रही है…?
सूत्रों की माने तो अब मजबूरन आम जनमानस क्षेत्रीय नागरिक एवं श्रमिक मिलकर अपने अधिकारों के लिए बड़े आंदोलन की राह खोज रहे हैं।
कैमोर ब्यूरो गुलशन चक्रवर्ती