जर्जर दीवार बनी काल: स्कूल परिसर में ढही मौत, कक्षा 5वीं के मासूम राजकुमार की जिंदगी मलबे में दबी

कटनी की औद्योगिक नगरी कैमोर से सटे विजयराघवगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बम्हंगवा की शासकीय माध्यमिक शाला में सोमवार को ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जर्जर और उपेक्षित पड़ी पुरानी स्कूल बिल्डिंग की दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी और उसकी चपेट में आकर कक्षा 5वीं के छात्र राजकुमार बर्मन की जान चली गई। इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद गांव में मातम और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश साफ देखा जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक सुबह लगभग 11 बजे राजकुमार शौच के लिए स्कूल परिसर की ओर गया था। तभी वर्षों से खस्ताहाल पड़ी पुरानी इमारत की दीवार अचानक ढह गई और वह मलबे के नीचे दब गया। कुछ देर तक किसी को भनक तक नहीं लगी। बाद में एक अन्य छात्र ने जब उसे खोजा तो वह मलबे में दबा मिला। आनन-फानन में एम्बुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन समय पर सहायता नहीं पहुंची। अंततः ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए ऑटो से उसे शासकीय अस्पताल विजयराघवगढ़ पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि इस जर्जर भवन को लंबे समय से हटाने की मांग की जा रही थी, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखें मूंदे रखीं। लापरवाही की कीमत एक मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। राजकुमार के पिता का एक वर्ष पहले ही बीमारी से निधन हो चुका था और उसकी मां फुल्की का ठेला लगाकर परिवार पाल रही है। अब इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

ग्रामीणों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि विद्यालय के समीप स्थित Adani ACC BMG Mines में होने वाली भारी ब्लास्टिंग से नई इमारतों में भी दरारें आ चुकी हैं, जबकि पुरानी बिल्डिंग पहले से ही जर्जर थी। सवाल यह उठता है कि जब खतरा स्पष्ट था, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?

यह हादसा शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई शासकीय स्कूल भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। अब ग्रामीण दोषियों पर सख्त कार्रवाई, जर्जर भवनों के तत्काल सर्वे और ध्वस्तीकरण की मांग कर रहे हैं।

मासूम राजकुमार की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की चूक का कड़वा सच बनकर सामने आई है।

 

ब्यूरो गुलशन चक्रवर्ती की कलम से…

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