आखिर एक प्रशासनिक भूल की सजा छात्र क्यों भुगते?
प्रवेश पत्र की चूक ने छीना बोर्ड परीक्षा का अधिकार, छात्र का भविष्य अधर में

संस्कृत की जगह अंग्रेजी अंकित, सुधार की गुहार अनसुनी
जबलपुर के बरेला (वार्ड क्रमांक 3) में एक प्रशासनिक लापरवाही ने एक छात्र के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। मनोहर लाल विश्वकर्मा के पुत्र शरद विश्वकर्मा, जो कि सीएम राइज़ स्कूल बरेला का कक्षा 10वीं का छात्र है, को प्रवेश पत्र में हुई गंभीर त्रुटि के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित होना पड़ा।
परिजनों के अनुसार, शरद का मुख्य विषय संस्कृत था, लेकिन जारी प्रवेश पत्र में विषय के स्थान पर अंग्रेजी अंकित कर दिया गया। त्रुटि सामने आते ही छात्र और उसके पिता ने विद्यालय के शिक्षकों एवं प्राचार्य से संपर्क कर सुधार की मांग की। आरोप है कि समय रहते सुधार की बजाय उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया गया।

परीक्षा केंद्र से लौटा छात्र, पिता लगा रहे न्याय की गुहार
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब शरद संस्कृत की परीक्षा देने परीक्षा केंद्र पहुँचा, लेकिन प्रवेश पत्र में विषय अलग दर्ज होने के कारण उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। एक वर्ष की मेहनत और भविष्य की उम्मीदें परीक्षा केंद्र के बाहर ही ठहर गईं।
अब मनोहर विश्वकर्मा विभिन्न शासकीय कार्यालयों और वरिष्ठ अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते त्रुटि सुधारी जाती, तो उनके पुत्र को यह दिन नहीं देखना पड़ता।
यह मामला न केवल एक छात्र के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है — आखिर एक प्रशासनिक भूल की सजा छात्र क्यों भुगते?