उन्नत नस्ल के पशुधन से बढ़ेगी किसानों की आय: झिरिया में अदाणी फाउंडेशन की ‘उन्नत वत्स प्रदर्शनी’ बनी आकर्षण का केंद्र

कटनी जिले के ग्राम झिरिया में पशुधन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जब अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित एकीकृत पशुधन विकास कार्यक्रम के तहत उन्नत नस्ल की बछियों (वत्स) की विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशुधन के प्रति जागरूक करना और आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा देना रहा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग कटनी डॉ. आर. के. सोनी उपस्थित रहे। उनके साथ विकासखंड पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी विजयराघवगढ़ डॉ. जे. पी. लाखेर, अमेहटा सीमेंट वर्क्स के हेड एच.आर. नितिन बत्रा, भाजपा विजयराघवगढ़ मंडल अध्यक्ष श्रीराम सोनी, सरपंच झिरिया सुरेन्द्र उरमलिया, सरपंच खरखरी गोमती पटेल, उपसरपंच नन्हवाराकलां अरुण बागरी तथा क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन अदाणी फाउंडेशन की क्लस्टर हेड ऐनेट बिश्वास के निर्देशन में किया गया, जिसमें अदाणी फाउंडेशन और बायफ की टीम ने संयुक्त रूप से आयोजन को सफल बनाया। इस प्रदर्शनी में झिरिया सहित आसपास के सात गांवों से 25 उन्नत नस्ल की बछियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों की टीम ने इनमें से तीन सर्वश्रेष्ठ वत्स का चयन किया और पशुपालकों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया।

प्रतियोगिता में नन्ह्वाराकलां के पशुपालक रामानुज पांडे की दो माह की गीर नस्ल की बछिया ने प्रथम स्थान हासिल किया। दूसरा स्थान कलेहरा के पशुपालक जगदीश यादव की भैंस वत्स को मिला, जबकि तीसरा स्थान खरखरी के रामकिशन पटेल की गीर नस्ल की बछिया को प्राप्त हुआ। पुरस्कार पाकर पशुपालकों के चेहरे खुशी से खिल उठे और अन्य ग्रामीणों में भी उन्नत पशुपालन के प्रति उत्साह दिखाई दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. सोनी ने पशुपालकों को उन्नत पशुपालन तकनीक, टीकाकरण, पशु पोषण और आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी देते हुए कहा कि उन्नत नस्ल के पशुधन से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने अदाणी फाउंडेशन और बायफ संस्थान के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान पशुपालन विभाग ने सभी देशी पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने का संकल्प भी दिलाया। साथ ही जनपद विजयराघवगढ़ के परियोजना गांवों में दूध उत्पादन को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाने के लिए मिल्क रूट और चिलिंग सेंटर स्थापित करने पर भी सहमति बनी।

गौरतलब है कि अदाणी फाउंडेशन, कैमोर एवं अमेहटा सीमेंट वर्क्स के सीएसआर कार्यक्रम के तहत झिरिया और खलवारा में दो पशुधन विकास केंद्रों के माध्यम से यह परियोजना पिछले तीन वर्षों से संचालित हो रही है, जिसका क्रियान्वयन बायफ लाईवलीहुड मध्यप्रदेश कर रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 1860 कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं, जिनमें से 1422 सॉर्टेड सीमेन के माध्यम से हुए हैं और 401 उन्नत नस्ल के वत्स जन्म ले चुके हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में उन्नत नस्ल के पशुधन को बढ़ावा देकर कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदलने की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग खोल रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।

कैमोर ब्यूरो गुलशन चक्रवर्ती

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