“सलाखों के पीछे उम्मीद की रसोई: महिला बंदियों को हुनर सिखाकर आत्मनिर्भरता की राह पर ला रहा होटल मैनेजमेंट संस्थान”

जबलपुर की केन्द्रीय जेल में इस बार सिर्फ सजा नहीं, बल्कि सुधार और स्वावलंबन की नई कहानी पक रही है। स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, जबलपुर ने महिला बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए ‘रीजनल क्यूज़ीन एंड स्नैक्स’ पर आधारित सात दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है।

17 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस प्रशिक्षण शिविर में 19 महिला बंदियों को न सिर्फ 21 तरह के व्यंजनों की विधाएं सिखाई जा रही हैं, बल्कि उन्हें प्रायोगिक तौर पर दक्ष भी बनाया जा रहा है। मकसद साफ है—जेल की दीवारों से बाहर निकलने के बाद ये महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

प्राचार्य दविंदर पाल सिंह सोढ़ी और कॉर्डिनेटर शुभंकर भट्टी के मार्गदर्शन में, फैकल्टी दीपक उप्रेती सहित विशेषज्ञ टीम जेल परिसर में ही पहुंचकर प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे उनके लिए रोजगार के अवसर और भी आसान हो सकें।

गौरतलब है कि यह पहली पहल नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी इसी संस्थान द्वारा बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ऐसे प्रयास यह साबित करते हैं कि सुधार की राह अगर सही दिशा में मिले, तो सलाखों के पीछे भी जिंदगी नए सिरे से संवर सकती है।

कुनाल सिंह

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