“सफाई या सिर्फ दिखावा? कटाई घाट में ‘अभियान’ के दावों की खुली पोल, महापौर की कार्यशैली पर उठे तीखे सवाल”

कटनी में नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है, और इस बार मामला सीधे शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली कटाई घाट नदी की सफाई से जुड़ा है। कागजों और बयानों में जहां ‘बड़ा अभियान’ चलने का दावा किया गया, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की परतें उधेड़ती नजर आ रही है।

महापौर प्रीति सूरी द्वारा करीब 200 कर्मचारियों के साथ सफाई अभियान चलाने का दावा किया गया था, जिसे व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ पेश किया गया। लेकिन मौके पर हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं—नदी में कहीं भी बड़े स्तर पर सफाई कार्य के स्पष्ट प्रमाण नजर नहीं आए। गंदगी जस की तस बनी हुई है, मानो अभियान सिर्फ कागजों और कैमरों तक सीमित रहा हो।

स्थानीय लोगों में इसको लेकर नाराजगी साफ दिख रही है। उनका कहना है कि सफाई के नाम पर महज दिखावा किया गया, जबकि असल में कोई ठोस काम नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो भी इन आरोपों को मजबूती देते नजर आ रहे हैं, जिनमें नदी की बदहाल स्थिति साफ झलकती है।

वायरल वीडियो का चित्र 

पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सफाई अभियान सिर्फ प्रचार का जरिया बनकर रह गया है? अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों को गंभीरता से लेकर हकीकत में सफाई सुनिश्चित करता है या फिर यह मामला भी महज चर्चा बनकर रह जाएगा।

कटनी ब्यूरो चीफ हीरा विश्वकर्मा की कलम से…

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