आस्था का उफान: कैमोर में जवारे विसर्जन की गूंज, भव्य झांकियों संग रातभर उमड़ा जनसैलाब

कैमोर (कटनी) चैत्र नवरात्र के समापन के बाद भी कैमोर नगर में आस्था का ज्वार थमता नजर नहीं आया। विजयराघवगढ़ तहसील के इस नगर में जवारे विसर्जन के अवसर पर ऐसा भक्तिमय नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को श्रद्धा और उल्लास से सराबोर कर दिया।

खलवारा बाज़ार स्थित झांकेश्वरी माता मंदिर से निकला भव्य जवारे विसर्जन जुलूस नगर की गलियों से गुजरते हुए आस्था की अलख जगाता रहा। जैसे-जैसे जुलूस आगे बढ़ा, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता चला गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

जुलूस की सबसे बड़ी खासियत रही आकर्षक झांकियां, जिनमें मां काली की तीन भव्य प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। इसके साथ ही भगवान हनुमान और शेर की जीवंत झांकियों ने राहगीरों को ठहरने पर मजबूर कर दिया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भीड़ इन झांकियों के दर्शन के लिए उमड़ती रही।

यह विशाल जुलूस झांकेश्वरी माता मंदिर से प्रारंभ होकर संतोषी माता मंदिर, काली माता मंदिर और पेट्रोल पंप मार्ग से होता हुआ खलवारा गांव स्थित माता की प्राचीन मढ़िया पहुंचा। देर रात करीब 2 बजे विधि-विधान के साथ जवारे का विसर्जन संपन्न हुआ, जहां श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर दिखाई दी।

मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा शर्बत और प्रसाद वितरण कर जुलूस का भव्य स्वागत किया गया, जिससे सेवा और समर्पण की भावना भी देखने को मिली।

इससे पूर्व मंदिर समिति द्वारा 51 मीटर लंबी चुनरी यात्रा भी निकाली गई थी, जिसने पूरे नगर को भक्ति के रंग में रंग दिया। वहीं नौ दिनों तक चले आरती-पूजन और प्रसाद वितरण में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।

पूरे आयोजन के दौरान कैमोर पुलिस की मुस्तैदी भी सराहनीय रही, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

आस्था, उत्साह और अनुशासन का ऐसा संगम कैमोर की पहचान बनता नजर आया।

 

कैमोर से ब्यूरो ब्यूरो गुलशन चक्रवर्ती की कलम से…

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