नगर निगम में भ्रष्टाचार का ‘काला साम्राज्य’! EOW के छापे में खुली करोड़ों की संपत्ति की परतें

जबलपुर। नगर निगम जबलपुर में भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश में आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में आय से अधिक संपत्ति के ऐसे सुराग सामने आए हैं, जिन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से मिल रही शिकायतों और प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर EOW ने न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त कर बुधवार सुबह योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने पोला राव के निवास सहित अन्य ठिकानों पर एक साथ दबिश दी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।

जांच के दौरान जो दस्तावेज और संपत्तियों का ब्यौरा सामने आया है, वह चौंकाने वाला बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पोला राव के नाम पर एक आलीशान फ्लैट, लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट तथा आंध्र प्रदेश में खरीदी गई कृषि भूमि के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा चार दोपहिया वाहन, एक लग्जरी चारपहिया वाहन, विभिन्न बैंक खातों की पासबुक, बीमा पॉलिसियां और बड़ी रकम के लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि EOW ने केवल अधिकारी के ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली ठेकेदार के यहां भी छापेमारी की है। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है और नगर निगम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के नेटवर्क की परतें भी खुल सकती हैं।

EOW के डीएसपी मनजीत सिंह ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों का परीक्षण कर वास्तविक संपत्ति और आय के स्रोतों का मिलान किया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्षों से सिस्टम के भीतर बैठे कुछ लोग अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति अर्जित करते रहे? और क्या इस पूरे मामले में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या ठेकेदारों की भूमिका भी सामने आएगी?

फिलहाल EOW की जांच जारी है। लेकिन इस छापेमारी ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आगे कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या यह कार्रवाई सिर्फ छापे तक सीमित रहती है या फिर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम भी उठाए जाते हैं।

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