कैमोर के खलवारा बाजार में उठे बड़े सवाल

कैमोर के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र खलवारा बाजार में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मोबाइल टावर के समीप खाली सरकारी जमीन पर पहले बड़े पैमाने पर कचरा और कबाड़ जमा किया जा रहा है, जिसके पीछे स्थायी कब्जे की तैयारी होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल सफाई व्यवस्था की लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने की सुनियोजित कोशिश हो सकती है। व्यापारियों का कहना है कि पहले कचरा डाला जाता है, फिर कबाड़ का ढेर लगाया जाता है और बाद में धीरे-धीरे पक्के निर्माण का रास्ता तैयार किया जाता है। उनका दावा है कि क्षेत्र में पहले भी इसी तरह सरकारी जमीन पर निर्माण होने के मामले सामने आ चुके हैं।


रहवासियों ने यह भी चिंता जताई है कि मोबाइल टावर के आसपास बढ़ता कचरा और कबाड़ न केवल बाजार की तस्वीर बिगाड़ रहा है, बल्कि आग लगने जैसी दुर्घटनाओं और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का खतरा भी बढ़ा रहा है। व्यापारियों के अनुसार, यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और नगर परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि मुख्य बाजार जैसे संवेदनशील इलाके में इतनी बड़ी मात्रा में कचरा और कबाड़ जमा होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होना कई आशंकाओं को जन्म देता है।
व्यापारी संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, कचरा हटाने तथा यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा पाया जाता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।


अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर सरकारी जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, या फिर मामला और गंभीर होने के बाद कार्रवाई होगी?

(नोट: इस समाचार में स्थानीय व्यापारियों एवं रहवासियों द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके दावों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संबंधित पक्ष और प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

ब्यूरो गुलशन चक्रवर्ती की कलम से…

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